Jai Yeshu
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अंतर भजन
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Anup Toppo
ओ
शीत लहरों के किनारों पे, मुझे तू ले चला
हो के न हो आभास तेरा, तू सदा बसता चला
हरियाली की गोद देता
तरु की छाया में लिपटता (2)
थपकियों से तू सुलाता
शांति से तू है भरता । आ
खो न जाऊँ, दृष्टि रखता
पथ दिखाए, कर पकड़ता (2)
खो भी जाता हूँ यदि तो
तू ही मुझको खोज लेता । आ
घाव मेरे सहलाता
प्रेम मरहम तू लगाता (2)
गिर भी जाता हूँ यदि तो
झट से त ही तार लेता । आ
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