Chorus
आज तुम्हारे चरणों में प्रभु (2)
एक बार फिर आया हूँ (2)
पाप से बोझिल जीवन अपना
तुझे चढ़ाने आया हूँ । (2)
Verse 1
एक वचन प्रभु तेरा ही बस मुझे छुड़ाने को
एक इशारा तेरा ही बस मुझे बचाने को
तेरी दृष्टि लाभ कर प्रभु तेरी प्रीति को मैं पा कर
जीवन अपना धन्य बनाऊँ (2)
Verse 2
तेरे चरण प्रभु तेरी शरण में हमको आश्रय दे
अमृत वाणी तेरी सुनकर निर्भय हो जाएँ
तेरे दर्शन को पाकर प्रभु
तेरे एक दर्शन में पाकर जीवन
अपना धन्य बनाऊँ ।