Chorus
सर्वस्व मेरा चढ़ा रहा हूँ तेरे लिए प्रभु
सर्वस्व मेरा चढ़ा रहा हूँ ।
Verse 1
हाथ पैर ये सुन्दर दान
तेरे अनुपम दया के काम
तेरे राज्य विस्तार के खातिर
आज तुझे मैं चढ़ा रहा हूँ
Verse 2
सुख-दुःख मेरे तेरे ही दान
दिन भर का परिश्रम आराम
भाई-बहन की सेवा हेतु
आज तुझे मैं चढ़ा रहा हूँ ।
Verse 3
काम-वचन और इच्छा मेरी
जीवन की सब स्वतंत्रता भी
अपनी सेवा में स्वीकारो
आज तुझे मैं चढ़ा रहा हूँ ।