Chorus
वचन तुम्हारा सुनता भगवन
हर पल आतुर प्राण (3)
Verse 1
तूने चुना है तेरे लिए करने उत्थान पतन देशों का
यह चेतना तुम भर दो भगवान मुझे यह वर दो (2)
Verse 2
मैं हूँ नन्ही रचना तेरी कैसे करूँ मैं वचन प्रसारण
यह वेदना तुम हर लो करतार मुझे वह बल दो (2)
Verse 3
तेरे घर का मैं हूँ मानव ये कामना मन में रहे
यह प्रेरणा अब भर दो भगवान अब मुझे वर दो (2)
Verse 4
मेरी साँसें तन से निकले तेरी छाया मुझमें रहे
मेरी कामना पूरी हो भगवान मुझे अब वर दो (2)