Chorus
महिमा महिमा महिमा, होवे स्वरग मैं {
धरती के लोगों, गाते महिमा (2) }
Verse 1
स्वरग धरा को सृजने वाला {
स्वर्ग धरा के पालनहार
स्वर्ग धरा के अंतर्यामी
धरती गगन के रखवाला (2) }
होवे महिमा तेरी, धारती वन उपवन मैं -2
Verse 2
गाते हैं साब स्वर्ग दूत गान {
धरती में होवे तब यशगान
जगत के पाप तु हार लेता है
दाया करो प्रभु पापी मानुष पर (2) }
होवे महिमा तेरे, धरती वन उपवन में -2
Verse 3
पिता के दाहिने विराजमान हैं {
सुनले विनय हमारे प्रभु
पवित्र आत्मा सांग समाए
तु ही है प्रभु सबसे महान (2) }
होवे महिमा तेरी, धरती वन उपवन में -2