Chorus
प्रेम नवैद्य है प्रेम है पूजा
प्रेम समर्पण है और नहीं दूजा। (2)
Verse 1
दुःखी जनों से प्रेम करो तुम, निर्धन जन से प्रेम करो
उनके नैनों से आँसू पोंछो, उनमें उल्लास भरो ।
उनके मन के पाप ताप, अभिशाप सभी धुल जाएंगे
यदि तुम उन्हें प्यार दो अपना, दुःखी जनों से प्रेम करो ।
Verse 2
सबके मन में छिपी हुई है
प्रभु की भक्ति पुण्य आलोक
सबके मन शुभ का वैभव
है सबका सतरंगा लोक ।
निर्धनता के कोहरे ने तो
कैद कर लिया है इनको
दुःखी जनों से प्रेम करो तो
हो जाएँ वो मुक्त विशोक ।
Verse 3
प्रेम नवैद्य है प्रेम है पूजा
प्रेम समर्पण है और नहीं दूजा
प्रेम है प्रार्थना प्रेम है वन्दन
प्रेम है प्रभु का सर्वोत्तम अभिनन्दन