Chorus
अर्पण करते हैं प्रभु, यह भेंट तुझे हम लाते हैं
अहण कर ले आज इसे, पावन कर दे हमें भी तू (2)
Verse 1
अपनी कलाकृति मुझमें उतार दी
जीवन साँस तूने मुझमें बहा दिया (2)
तेरे ही जीवन दान को
तेरे ही चरणों में लाता हूँ
तेरी अपार महिमा के खातिर
आज तुझे मैं समर्पित करता हूँ।
Verse 2
तेरी ही माटी की उपज मैं लाता हूँ
हृदय रूपी गागर मैं चढ़ाता हूँ (2)
तू तो प्रेम की बहती धार
शीतल निर्मल सुकोमल है
प्रेम की दो बूँद मुझमें बहा दो
यही है सब कुछ मेरे लिए प्रभु।