Verse 1
स्वर जो हमारे होठों पे हैं
उसमें छुपी है स्वामी तेरी ही धुन
तेरे दरवाजे पे आते हैं हम
पग-पग गाते हुए तेरे ही गुण
Chorus
जब-जब हम गायेंगे तेरा यश गायेंगे
महिमा तेरी सदा, सबको सुनायेंगे । {(2)}
Verse 2
सृष्टि में गूंजे तराने तेरे
जीवों ने तेरी ही तारीफ की
तेरी चमक से सुहाना लगे
चाँद सितारों का प्रकाश भी ।
Verse 3
सारी दुनिया में चारों पहर
स्वर्ग के राजा तेरा सम्मान हो
युग-युग तेरी ही कीर्ति चले
जीवन हमारा तेरी पहचान हो ।
Verse 4
वंदन अभिनंदन करें जो तेरा
उसको जगत में उजाला मिले
जो भी तुझे श्रद्धा से देखा करें
सुख उसे सबसे निराला मिले ।