Chorus
कितना सुंदर तेरा मंदिर, ईश हे कृपालु महान्
प्रभुवर जीवनाधार मेरा तू ईश है हकृपालु महान्। {(2)}
Verse 1
धन्य हैं जो यहाँ बसते, सदा ही तेरी स्तुति करते
धन्य हैं जिन्हें तू बल देता, सीधे मार्गों में चलने को। {(2)}
Verse 2
प्रभु के दर्शन पाने को व्याकुल रहता दिल मेरा
जीवनभर मैं गाऊँगा, अपने प्रियतम प्रभु का नाम {(2)}
Verse 3
गायें स्तुति हम ईश्वर की प्रेम कृपा का स्रोत वही
देता हमें वह निज वरदान स्वामी ईश्वर महिमावान {(2)}
Verse 4
आओ प्रभु के प्रांगण में, धन्य कहो तुम उसका नाम
धन्यवाद दो गाओ गीत, स्वर लहरों में रम जाओ ।{(2)}