Chorus
मुक्ति का प्याला आज उठाकर (2)
नाम प्रभु का लूँगा (2)
Verse 1
क्या मैं प्रभु को आज चढ़ाऊँ
उसके उपकारों के लिए (2)
मुक्ति का प्याला हाथ में लेकर नाम प्रभु का लूँगा ।
Verse 2
प्रभु के नाम को लेते हुए
धन्यवाद का बलि चढ़ाऊँ (2)
प्रभु की सारी प्रजा के सामने मन्नतें पूरी करूँगा
Verse 3
रोटी दाखरस रूप चढ़ाऊँ
प्रेम भाव इनसे दर्शाऊँ (2)
अर्पण मैं कर दूँगा ।