Chorus
प्रभु को अर्पण कर दें आज अपना तन, अपना मन
अपना धन, प्रभु को अर्पण कर दें आज (2)
Verse 1
युगों-युगों से है उसका प्यार
हम पर उसकी कृपा अपार (2)
उसने बुलाया है अपने पास
हम पर प्रभु की लगी है आस ।
Verse 2
जीवन उसने नया दिया
निज बेटे को दान दिया (2)
वो है हमारा सृजनहार
उसकी महिमा अपरंपार ।
Verse 3
जीवन कर दें प्रभु को अर्पण
इच्छा बुद्धि आजादी समर्पण (2)
वो है हमारा जीवन आधार
उसने सबका किया उद्धार ।