Chorus
रोटी का उपहार लाये, दाखरस की भेंट प्रभु (2)
ग्रहण कर आशीष दे दो, बन जाये तेरा बदन (2)
Verse 1
धरती की ये उपज सारी, मानव श्रम के फल प्रभु (2)
कर दे पावन कर दे निर्मल, सब है तेरा मेरे प्रभु (2)
Verse 2
जीवन अपना करते अर्पण, जीवन के दुःख-सुख प्रभु (2)
हर ले सब कुछ, दे नवजीवन, प्यार भरा वरदान (2)